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सोमवार, 12 दिसंबर 2011

संस्कृति और माँसाहार ?

### पं. डी. के. शर्मा 'वत्स' ने कहा है और वास्तव में बिल्कुल सही कहा है कि
आयुर्वेद शास्त्र, उसके निघण्टु कोष तथा पाकशास्त्र भी मानव जाति के आहार के विषय में पर्याप्त प्रकाश डालने वाले ग्रन्थ हैं.

आयुर्वेद शास्त्र बताता है कि महान आर्य पूर्वजों की शक्ति का रहस्य क्या था ?

विचार मंथन के लिए प्रेरणा देती उनकी पोस्ट देखिये :

वैदिक संस्कृति और माँसाहार ???

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

सच बयान करते हुए ब्लॉगर्स मीट वीकली में शामिल कुछ चुनिंदा लिंक्स

महेंद्र श्रीवास्तव जी की रचना 
ईमानदारी की बात में भी ईमानदारी नहीं..



देखिए एक बढ़िया गर्मागर्म चर्चा 

यज्ञ हो तो हिंसा कैसे ।। वेद विशेष ।।

और इसी ब्लॉग पर 

वैदिक यज्ञों में पशुबलि---एक भ्रामक दुष्प्रचार

वैदिक शब्दावली की एक जो सबसे बडी विशेषता है, वो ये कि वैदिक नामपद अपने नामारूप पूर्णत: सार्थक हैं. वेदों में भिन्न-भिन्न वस्तुओं के जो नाम मिलते हैं, वे किसी भी रूप में अपने धात्वर्थों का त्याग नहीं करते.
मुशायरा ब्लॉग पर 

"प्यारी-प्यारी बातें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


बात-बात में हो जाती हैं, देखो कितनी सारी बातें।
घर-परिवार, देश-दुनिया की, होतीं सबसे न्यारी बातें।।
वेद कुर'आन पर

हिंदू धर्म और इस्लाम में पशु बलि और क़ुरबानी पर एक यादगार संवाद

भारत में सांस्कृतिक बहुलता पाई जाती है और यह ज़बर्दस्त है।
यहां एक ही समाज में ऐसे लोग मिलेंगे जो कि एक बात को सही मानते हैं लेकिन यहां ऐसे लोग भी मिलेंगे जो कि उस बात को सही मानते हैं जो कि पहली बात के ठीक विपरीत है। यहां के लोगों ने इसी माहौल में जीना सीख लिया है।
प्रायः लोग यहां अपनी परंपराओं का पालन करते हैं और दूसरों की परंपराओं पर सरेआम उंगली उठाकर उन्हें ग़लत नहीं कहते।

प्रेरणा जी के हुनर का क़ायल कर गई ब्लागर्स मीट वीकली 20

रविवार, 13 नवंबर 2011

जितनी बंटनी थी बंट चुकी ये ज़मीं,

जितनी बंटनी थी बंट चुकी ये ज़मीं,
अब तो बस आसमान बाकी है |
सर क़लम होंगे कल यहाँ उनके,
जिनके मुंह में ज़बान बाक़ी है ||
http://hbfint.blogspot.com/2011/11/17-happy-childrans-day.html

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

ग़म इतना खा जाने के बाद

Bloggers' Meet Weekly का लिंक 
अब तुम्हीं से क्या छुपाएं, सब बता जाने के बाद।
हम कहाँ भूखे रहे, ग़म इतना खा जाने के बाद।।
http://hbfint.blogspot.com/2011/10/bloggers-meet-weekly-14-character.html

रविवार, 16 अक्टूबर 2011

माँ

Please See Bloggers' Meet Weekly 13

'माँ' The mother Part 1 


यह एक विशेष भेंट है जो कि हम अपने पाठकों की नज़्र कर रहे हैं।
उम्मीद है कि यह भेंट आप सभी भाई बहनों को ज़रूर पसंद आएगी।

मौत की आग़ोश में जब थक के सो जाती है माँ
तब कहीं जाकर ‘रज़ा‘ थोड़ा सुकूं पाती है माँ
 

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

ब्लॉगर्स मीट और गलतफहमियां

मसला कोई भी और कितना भी बिगड़ा हुआ क्यों न हो लेकिन वह जब भी सुलझेगा , बातचीत से ही सुलझेगा .
यह एक अहम सूत्र है.
ब्लॉगर्स मीट वीकली का मकसद यही है कि फासले कम हों और गलतफहमियां दूर हों .
आप सभी के विचार अमूल्य हैं , हिन्दी ब्लौगिंग को समृद्ध करने में इनका उपयोग करें.

 ब्लॉगर्स मीट वीकली (11)

बुधवार, 7 सितंबर 2011

कौन हैं ये राइट ब्रदर्स ?

केवल सम्मानित होने और सम्मानित करने के शौक़ में
और इसी के साथ हिंदी ब्लॉगर्स की पतली जेब से मोटी रक़म भी निकाल लेंगे राइट ब्रदर्स।
कौन हैं ये राइट ब्रदर्स ?
दुनिया इन्हें जिस नाम से भी जाने हम तो इन्हें अवि-रवि की जोड़ी के नाम से जानते हैं।
इनकी ठगी की पूरी दास्तान, नहीं पूरी नहीं बल्कि अधूरी दास्तान देखिए हमारे ब्लॉग पर , 

बड़ा ब्लॉगर वह है जो कमाता है



और डेल कारनेगी ने कहा है कि ‘आदमी को सबसे प्यारी आवाज़ उसके नाम की आवाज़ लगती है‘
ठग इस बात को जानते हैं और वे लोगों की इसी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर अपनी रददी को किताब के भाव बेच भागते हैं।

देखिये कमाने के कुछ जायज़ तरीके (वीडियो)

सोमवार, 5 सितंबर 2011

यह है बीजेपी की असलियत ?

Please see
http://hbfint.blogspot.com/2011/09/blog-post_06.html
क्या बीजेपी शैतानों की जमात है ?

यह बात बिना किसी के बताए मुसलमानों के दिमाग़ में पहले से ही है और समय समय पर इस धारणा को बीजेपी लीडर्स ख़ुद ही पुष्ट करते रहते हैं।
झारखंड के मुस्लिम गवर्नर ने अपने काम की शुरूआत अल्लाह के नाम से की तो उसे सराहने के बजाय विवाद पैदा करके वे मुसलमानों के दिलों में अपने लिए मौजूद संदेह को और ज़्यादा गहरा कर रहे हैं।
मज़ारों पर चादरें भेजना या रमज़ान में अफ़्तार पार्टियों का आयोजन ये लोग मुसलमानों को केवल धोखा देने के लिए करते हैं।
भगवा रंग और राम नाम का इस्तेमाल भी ये लोग इसी मक़सद से करते हैं।
ये रहीम के नहीं हैं तो क्या, ये तो राम के भी न हुए।
इसीलिए ये न घर के हुए और न घाट के रहे।

इनका यही अमल जारी रहा तो ये बीच में घूमने लायक़ भी नहीं बचेंगे।
(बहवाला - राष्ट्रीय सहारा उर्दू दैनिक मुख पृष्ठ दिनांक 6 सितंबर 2011 दिल्ली)



यह है बीजेपी की असलियत ?

हमारी 2 पोस्ट को सुपरहिट और 5 पोस्ट्स को सबसे चर्चित पोस्ट क़रार दिया है नभाटा ने।

जी हां, दोस्तो , हमारी 2 पोस्ट को सुपरहिट और 5 पोस्ट्स को सबसे चर्चित पोस्ट क़रार दिया है नभाटा ने।
आप भी देखिए निम्न लिंक पर जाकर।
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/
थोड़ी जगह हमने दूसरों के लिए भी छोड़ दी है।
ज़रा अच्छा सा नहीं लगता कि सारी पोस्ट्स वहां एक ही आदमी की नज़र आएं।
आप भी अपनी पोस्ट लगाइये नभाटा पर और पाइये नए पाठकों से जुड़ने का सुखद अहसास।
---शांति को समर्पित एक साईट 
 

रविवार, 4 सितंबर 2011

हाजी अब्दुल रहीम निःस्वार्थ सेवा की मिसाल .....हरीश सिंह


हाजी अब्दुल रहीम अंसारी साहब
कागज़ी समाजसेवी सबक़ लें ... 

 समाचार पत्रों में आप अक्सर समाजसेवियों के बारे में पढ़ते रहते है. किन्तु जो समाजसेवी समाचार पत्रों की सुर्खियाँ बनते है उसके पीछे कितनी सतनी सच्चाई होती है. शायद हर पत्रकार जानता है. ऐसे समाजसेवियों को आईना दिखने के लिए हैं.  हाजी अब्दुल रहीम अंसारी, एक ऐसा नाम जो उन लोंगो के लिए के लिए प्रेरणा श्रोत है जो खुद को समाजसेवी कहलाने के लिए परेशान रहते है किन्तु समाजसेवा का कोई कार्य नहीं करते. 

मूलतः संत रविदासनगर भदोही जनपद के काजीपुर मुहल्ले के रहने वाले अब्दुल रहीम अंसारी नगर के अयोध्यापुरी प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कई वर्षो तक  कार्यरत रहे. २००७ में वे इसी विद्यालय से अवकाश प्राप्त किये, दो दिन घर पर रहने के बाद उन्हें एहसास हुआ की वे घर पर खाली नहीं रह सकते. लिहाजा फिर पहुँच गए उसी स्कूल जहाँ बच्चो को पढ़ाते थे, उन्हें देखते ही बच्चे चहक उठे. उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य से पढ़ाने की इच्छा जाहिर की और नियमित रूप से विद्यालय आकर पढ़ाने लगे. यही नहीं विद्यालय का लेखा जोखा पहले उन्ही के पास रहता था, दुबारा यह जिम्मेदारी उन्हें फिर सौंप दी गयी.  २००९ में उन्होंने हज भी किया. पांच वक़्त के नमाज़ी अब्दुल रहीम अभी तक नियमित रूप से विद्यालय  आकर बच्चो को शिक्षा देते रहते है. उन्हीं के दिशा निर्देश पर पूरा विद्यालय परिवार चलता है. एक बार विद्यालय के प्रधानाद्यापक और सहायक अध्यापक राजीव श्रीवास्तव ने उन्हें अपने वेतन से कुछ पारिश्रमिक देने की बात कही तो वे  भड़क उठे.  कहा आज भी सरकार उन्हें आधी तनख्वाह देती है. हराम का लेना उन्हें पसंद नहीं जब तक शरीर साथ देगा वे बच्चों को नियमित शिक्षा देंगे. यही नहीं वे होमियोपैथिक के अच्छे जानकर भी है. विद्यालय के बच्चे जब बीमार होते हैं तो वही दवा देते हैं.. यही नहीं जो भी उनके पास इलाज के लिए पहुँचता है. उसे भी दवा देते है. और इस दवा का वे कभी एक पैसा तक नहीं लेते. आज वे अपने मुहल्ले में वे सम्मान की दृष्टि से देखे जाते है.  आज जहा लोग पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते है. ऐसे में वे सम्मान जनक पात्र ही नहीं वरन पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत  है.
सच इंसानियत, समाजसेवा का जज्बा हर इन्सान में होना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म का हो. ऐसे महान व्यक्तित्व को मैं सलाम करता हूँ. यदि ऐसे लोंगो का अनुसरण लोग करें तो जरा सोचिये समाज का क्या स्वरूप होगा. 

हाजी अब्दुल रहीम साहब के बारे में हमें यह सारी जानकारी हमारे मित्र हरीश सिंह जी ने दी है जो कि ख़ुद भदोही में ही रहते हैं। यह जानकर अच्छा लगता है कि हमारे बीच  अभी ऐसे  लोग मौजूद हैं जो कि अपने फ़र्ज़ पहचानते हैं और उसे अदा करते हैं और यह तो सोने पर सुहागे जैसा सुखद है कि यह सब करने वाला एक मुसलमान है।
हमारी दुआ है कि मुसलमानों को विशेष रूप से हाजी जी के अमल से प्रेरणा मिले और यूं तो वह हरेक के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं ही।
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आज सबसे पहले हाजी अब्दुल रहीम साहब का ही ज़िक्र किया गया है। जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं- 

रविवार, 28 अगस्त 2011

अख़तर ख़ान अकेला साहब ने ब्लॉग की दुनिया में रच डाला इतिहास

एक बिल्कुल ताज़ा ख़बर हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया से, ताकि आप जान लें कि कीर्तिमान यहां भी स्थापित किये जा रहे हैं तमाम तरह की दिक्क़तों के दरम्यान।
हम बात कर रहे हैं हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया के एक सुपर स्टार जनाब भाई अख़तर ख़ान अकेला साहब की जो कोटा राजस्थान से संबंध रखते हैं और राजस्थान हाईकोर्ट में एडवोकेट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जनाब पत्रकार भी हैं और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी और विभिन्न धर्म-मतों के अनुयायियों दरम्यान प्यार और भाईचारे के लिए काम कर रहे हैं।
हिंदी ब्लॉगिंग के ज़रिये भी वे यही प्यार मुहब्बत का पैग़ाम देते आए हैं और नज़रअंदाज़ किए जाने के बावजूद उन्होंने अपने लेखन कर्म को एक साधना के तौर पर जारी रखा और मात्र सवा साल में ही उन्होंने साढ़े तीन हज़ार पोस्ट्स रच डालीं।
है न कमाल ?
यह वाक़ई एक कमाल है और गिनीज़ बुक आफ़ वल्र्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किये जाने लायक़ है।

उन्होंने अपने निजी ब्लॉग के अलावा भी बहुत से साझा ब्लॉग बना रखे हैं, जहां उन्हें बहुत पढ़ा जाता है।
शरपसंद हमेशा थोड़े से होते हैं। अगर उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया जाए तो बाक़ी सामान्य लोग सदैव स्वागत करते हैं।
जनाब अख़तर ख़ान अकेला साहब का स्वागत आज हिंदी ब्लॉग जगत विभिन्न मंचों से कर रहा है जिसमें ‘फ़ेसबुक और ब्लॉगस्पॉट‘ मुख्य हैं।
इस अवसर हमने उन्हें मुबारकबाद देते हुए उनकी सवा साल की मेहनत की संक्षिप्त सी समीक्षा भी की है और यही समीक्षा उनकी पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में पब्लिश भी की है।
यह समीक्षा भी यहां दर्ज की जाती है-

अख़तर ख़ान अकेला साहब ने ब्लॉग की दुनिया में रच डाला इतिहास
भाई साहब ! आपने साढ़े तीन हज़ार पोस्ट्स आपने लिख डालीं और उन पर आपको इससे आधी टिप्पणियां भी नहीं मिलीं , इसके बावजूद आपका ब्लॉग बहुत पढ़ा जाता है। यह बात आपके ब्लॉग पर लगा हुआ टूल बता रहा है। यही आपकी कामयाबी है।
जो लोग तंगनज़र हैं और तास्सुब के शिकार हैं, जो लोग इस ब्लॉग जगत के सर्वेसर्वा बनने के ख्वाहिशमंद थे, उनके सपनों के कांचमहल को अपने रोड रोलर से रौंदने वाला मैं ही तो हूं। जब सब साफ़ हो गया तो शांति तो होनी ही थी और यह बनी भी रहेगी जब तक कि अगला कोई महत्वाकांक्षी अपना सिर नहीं उठाएगा।

नफ़रत के इन सौदागरों के पास सिर्फ़ नफ़रत है और गहरी चालें हैं। जिस चीज़ का ज़िक्र आप आज कर रहे हैं, इसी को हमने ‘वर्चुअल जर्नलिज़्म‘ का नाम दिया है और इसका काफ़ी हद तक उन्मूलन भी किया। इन शरपसंदों के क़ब्ज़े में सिर्फ़ अपने अल्फ़ाज़ हैं, ये आपको कुछ नहीं देते तो मत दें, हम तो इन्हें भी टिप्पणियां दे देते हैं। मालूम नहीं कब बात समझ में आ जाए और कब इनका दिल बदल जाए और न भी बदले तो हमारा नाम सामने देखकर एक खटक तो हमेशा ये महसूस करते ही रहेंगे कि ‘हाय ! हमने जो सोचा था वह न हुआ।‘
अरे भाई सोचा तो तुमने मौत के बारे में भी नहीं है लेकिन मौत बहरहाल तुम्हें आकर रहेगी और तब तुम्हारा फ़ैसला तुम्हारे बदन की सजावट और तुम्हारे माल की दिखावट की बुनियाद पर नहीं होगा बल्कि तब तुम जांचे जाओगे अपनी हक़ीक़त की बुनियाद पर, अपनी नीयत और अपनी मंशा की बुनियाद पर और तब कामयाब वही रहेगा जिसने दुनिया में इंसाफ़ की और प्यार मुहब्बत की बात की होगी, अम्नो अमान की कोशिशें की होंगी।

इस ऐतबार से आप कामयाब हैं!
आपको कामयाबी की बहुत बहुत मुबारकबाद !

फ़ेसबुक पर भी मैं आपकी इस कामयाबी की चर्चा की है, जिसे आप निम्न लिंक पर देख सकते हैं।
अगर आपने हमें वहां अभी  न जोड़ा हो तो कृप्या ढूंढकर जोड़ लीजिएगा।

आप पर ख़ुदा की तरफ़ से सलामती और मेहर हो।

अख़तर ख़ान अकेला साहब ने ब्लॉग की दुनिया में रच डाला इतिहास

रविवार, 31 जुलाई 2011

‘ब्लॉगर्स मीट वीकली 2‘ एक संक्षिप्त रिपोर्ट

और अनामिका जी का विरोध औरतों के नंगे मार्च के खि़लाफ़
और साउथ अफ़्रीक़ा में बलात्कार की ज़्यादती के कारणों पर चर्चा
और हिंदी ब्लॉग जगत के नामी गिरामी ब्लॉगर्स के लेख

देखिए की
‘ब्लॉगर्स मीट वीकली 2‘ में
और यह कार्टून तो यहीं देख लीजिए

बाबा-सूट!!

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

बाबा रामदेव HBFI पर

बरसों पहले जब दुनिया बाबा की दीवानी थी। तब भी हमने लोगों को बताया था कि योग के नाम पर बिज़नैस किया जा रहा है। पश्चिम में योग की मूल आत्मा वैराग्य को ग्रहण नहीं किया जा रहा है बल्कि वहां की औरतें अपने को  आकर्षक बनाने के लिए बाबाओं से योग सीखती हैं और इसी मक़सद से वहां के पुरूष भी योग सीख रहे हैं। तनाव से मुक्ति के लिए भी वे योग को एक एक्सरसाइज़ के तौर पर ही लेते हैं। लेकिन हमारे कहने पर तब उचित ध्यान ही नहीं दिया गया बल्कि हमें कह दिया गया कि आप तो हैं ही देश के ग़द्दार ।
जिन्हें राष्ट्रवादियों का अग्रदूत माना जा रहा था, उनका कच्चा चिठ्ठा आज सबके सामने है तो समझा जा सकता है कि जो लोग इनके साथ थे या इनके पीछे थे, उनके कर्म कैसे होंगे ?
आज बाबा और उनका राज़दार बालकृष्ण दोनों ही चिंतातुर नज़र आते हैं। वे तनाव दूर करने के लिए ख़ुद योग का सहारा क्यों नहीं लेते ?
गद्दी पर क़ब्ज़े के लिए गुरू जी को ऊर्ध्वगमन  करा देने वाले शिष्य कुछ भी कर सकते हैं। अपने ही जैसे राजनीतिज्ञों से अगर वह भी दूसरे बाबाओं की तरह सैटिंग कर लेते तो आज उनके आभामंडल पर यूं आंच न आती। जो अफ़सर कल तक पांव छूते थे वे आज गला पकड़ रहे हैं।
ये बाबा तो लोक व्यवहार की नीति तक से अन्जान निकले।
आदरणीय श्री महेंद्र श्रीवास्तव जी का लेख इन सभी बातों को बेहतरीन अंदाज़ में बयान करता है और यह तारीफ़ दिल से निकल रही है। 
इस मंच को एक बेहतरीन लेख देने के लिए आपका शुक्रिया !
उनके लेख का लिंक नीचे दिया जा रहा है

अविनाश वाचस्पति जी का लेख भी इसी विषय पर एक करारा व्यंग्य है। उसका लिंक यह है

'ब्लॉगर्स मीट वीकली' के ज़रिये ब्लॉग पर मीत आयोजित करने वाला पहला ब्लॉग भी यही  है .

नारी और पुरुष की चर्चा खूब चल रही है आजकल

ब्लॉग जगत में आजकल नारी और पुरुष की चर्चा खूब चल रही है . कुछ दूसरी पोस्ट भी काफी पढ़ी  जा रही हैं . हिन्दी ब्लॉग जगत की सबसे ज्यादा पढी जाने वाली पोस्ट में से कुछ हम लाये हैं आपके लिए . निम्न लिंक्स पर जाकर आप इनका लुत्फ़ उठायें
आशा है आज इन पोस्ट्स पर कुछ नए पाठक अवश्य पहुंचेंगे.

ब्लॉग की ख़बरें
देखिये HBFI पर
१- ब्लॉग लिखने का तरीक़ा Hindi Blogging Guide (20)
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/hindi-blogging-guide-20.html

 और यह भी
२- ब्लॉगर्स मीट वीकली : एक ऐतिहासिक आयोजन
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_8924.html
३- दोस्तों आज मेरे बढे भाई समीर लाल जी का जन्म दिन है http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_4407.html मुबारक हो समीर लाल जी को बहुत बहुत .

४- मनी मैटर? नो टेंशन, स्कॉलरशिप है न ! -Sapna Kushwaha 
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/sapna-kushwaha.html

५- प्रतिभा का सम्मान है स्कॉलरशिप -Anurag Mishra

६- बर्तनों पर लगी हिन्दू और मुसलमान की मोहर और बालिका अमृता ! भाग १

http://bhartiynari.blogspot.com/2011/07/1.html

७- प्रकृति की पीड़ा कौन सुनेगा ?
http://dpmishra-tiger.blogspot.com/2009/09/blog-post_7731.html

८- क्या हम सेक्स जनित विसंगतियों पर काबू पा सकते हैं?
http://www.amankapaigham.com/2011/07/blog-post_28.html

९- ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly

१०- ये मेरी किस्मत
http://www.hamarivani.com/redirect_post.php?blog_id=1701&post_id=92867&url=mymaahi.blogspot.com%2F2011%2F07%2Fblog-post_29.html

११- अपना आईक्यू जानना है तो...खुशदीप 
http://www.hamarivani.com/redirect_post.php?blog_id=42&post_id=92863&url=feedproxy.google.com%2F%7Er%2Fdeshnama%2FiZss%2F%7E3%2F3abRCjTlMgk%2Fblog-post_29.html

१२- कार्टून:- क्या आपकी नौकरी का भविष्य ऐसा गोल्डन है ? 

http://www.hamarivani.com/redirect_post.php?blog_id=84&post_id=92872&url=

*हिंदी ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने के मक़सद से ही
 आपको यह लिंक दिखाए जाते हैं जिन्हें आप अपने मित्रों को फ़ॉरवर्ड कर दिया
 करें ताकि नए लोग हिंदी ब्लॉगिंग से जु़ड़ें। अगर आप भी अपना ब्लॉग संचालित करते हैं
 या आप सामान्य नेट यूज़र हैं और हिंदी ब्लॉगर्स से कोई विचार साझा करना चाहते
 हैं तो आप भी अपनी पोस्ट का लिंक या कंटेंट भेज सकते हैं। उसे भारतीय बलॉग समाचार के ज़रिये ज़्यादा से
 ज़्यादा हिंदी ब्लॉगर्स तक पहुंचा दिया जाएगा। शर्त यह है कि यह कंटेंट
 देशप्रेम की भावना को बढ़ाने वाला और समाज के व्यापक हित में होना चाहिए। हिंदी
 ब्लॉगिंग को सार्थक दिशा देना ही ‘भारतीय बलॉग समाचार‘ का मक़सद है।

 धन्यवाद !

शनिवार, 23 जुलाई 2011

क्या लेडी रचना का यह क़दम ब्लॉगिंग और इंसानियत के लिहाज़ से ठीक है ?

लेडी रचना ने शिखा कौशिक जी और शालिनी कौशिक जी, दोनों को ही ‘नारी‘ ब्लॉग से आउट कर दिया।
कारण ?
कारण केवल यह है कि लेडी रचना उन दोनों पर अपनी पसंद-नापसंद थोप रही थीं। वे जिस आदमी को नापसंद करती हैं, उसके ब्लॉग में वे लेख लिखती हैं।
लेकिन सवाल यह है कि उन्होंने बलि चढ़ाने के लिए ये दो ब्राह्मण कन्याएं ही क्यों चुनीं ?
उस आदमी के ब्लॉग में तो बहुत सी प्रतिष्ठित साहित्यकाराएं तक शामिल हैं।
बात यह है कि तानाशाही की चक्की में अपेक्षाकृत कमज़ोर ही पीसे जाते हैं। ये दोनों बहनें अपेक्षाकृत नई हैं और किसी गुट में भी नहीं हैं। ख़ुशामद और चापलूसी भी इनके मिज़ाज में नहीं है लिहाज़ा इन्हें पीसने के बाद लेडी रचना को किसी तूफ़ान के उठने की उम्मीद नहीं है।
नारी अधिकारों के लिए लड़ने का दावा करने वाली लेडी रचना ने दो नारियों की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के अधिकार का और राय की आज़ादी के इज़्हार के हक़ का ख़ून कर डाला और इस तानाशाही को नाम दिया इंसाफ़ का।
अगर यही इंसाफ़ है तो दो के साथ ही यह बर्ताव क्यों जबकि यह जुर्म तो और भी नारियां कर रही हैं और फिर भी वे ‘नारी‘ ब्लॉग में लिख रही हैं ?
आप बताएं कि क्या लेडी रचना का यह क़दम ब्लॉगिंग और इंसानियत के लिहाज़ से ठीक है ?
इसी के साथ यह भी देख लीजिए कि बोलते समय वे किस तरह की गालियों और मुहावरों का प्रयोग करती हैं ?
क्या इस तरह की अहंकारपूर्ण अभद्र भाषा बोलने वाली महिला को अपने लिए किसी सम्मान की आशा रखनी चाहिए ?
पूरी तफ़्सील जानने के लिए देखिए शिखा कौशिक जी की रिपोर्ट

रचना जी का शुक्रिया -नारी ब्लॉग से हटाने के लिए

सोमवार, 18 जुलाई 2011

काबिले तारीफ हैं फिरदौस

भदोही:/बीबीएस न्यूज़/  : ब्लॉग जगत में ऐसे धुरंधर भरे पड़े है जिनकी तारीफ की जाय तो वह छोटी पड़ जाती है,  ब्लॉग जगत में महिलाओ ने भी बहुत बड़ा योगदान दिया है. पर उन्ही में से एक है फिरदौस खान, जिनकी लेखनी खुद ही उनकी पहचान है. उनकी बेबाक बाते व लेखन शैली का विरोध बहुत से ऐसे लोंगो ने किया है जो संकुचित विचारधारा के पर उन बातो को दरकिनार करते हुए उन्होंने अपना सफ़र अनवरत जारी रखा और अपना अलग ही मुकाम बनाया. उनकी लेखनी से ही प्रभावित होकर उन्हें "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" पर भी सहयोग देने के लिए आमंत्रित किया गया था पर उन्होंने शांत रहना ही उचित समझा.
वे  पत्रकार, शायरा और कहानीकार... उर्दू, हिन्दी और पंजाबी में लेखन. उर्दू, हिन्दी, पंजाबी, गुजराती, इंग्लिश और अरबी भाषा का ज्ञान... दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हरिभूमि में कई वर्षों तक सेवाएं दीं...अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया... ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर कार्यक्रमों का प्रसारण... ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनल के लिए एंकरिंग भी की है. दैनिक हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण ट्रिब्यून, जनसत्ता, राजस्थान पत्रिका, नवभारत, अजीत समाचार, देशबंधु और लोकमत सहित देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और समाचार व फीचर्स एजेंसी के लिए लेखन करने के साथ ... ' गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' नामक एक किताब प्रकाशित की है ... इसके अलावा डिस्कवरी चैनल सहित अन्य टेलीविज़न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन जारी रखी है ... उन्हें उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए अनेक पुरस्कारों ने नवाज़ा जा चुका है...इसके अलावा कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी शिरकत की है ...कई बरसों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली... उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रशियन अदब (साहित्य) में ख़ास दिलचस्पी. फ़िलहाल 'स्टार न्यूज़ एजेंसी' और 'स्टार वेब मीडिया' में समूह संपादक का दायित्व संभाल रही है ..
उनका  ताज़ा लेख "खेत में सिन्दूर" उनके ब्लॉग की शोभा बढ़ा रहा है.
चलते-चलते
 मोबाईल किस तरह युवाओ को बर्बाद कर रहा है. इसकी जानकारी दे रहे है. HBFI पर डॉ. अनवर जमाल खान  "

मोबाइल : प्यार का आवश्यक उपकरण Mobile

बुधवार, 13 जुलाई 2011

कहाँ कहाँ छिपे हैं आतंकवादियों के मददगार अर्थात ग़ददार ?

मुंबई में हुए बम ब्लास्ट को लेकर ब्लॉगर्स में बहुत ग़म और ग़ुस्सा है । उनका कहना हैकि
देश के दुश्मनों के लिए काम करने वाले ग़द्दारों को चुन चुन कर ढूंढने की ज़रूरत है और उन्हें सरेआम चैराहे पर फांसी दे दी जाए। चुन चुन कर ढूंढना इसलिए ज़रूरी है कि आज ये हरेक वर्ग में मौजूद हैं। इनका नाम और संस्कृति कुछ भी हो सकती है, ये किसी भी प्रतिष्ठित परिवार के सदस्य हो सकते हैं। पिछले दिनों ऐसे कई आतंकवादी भी पकड़े गए हैं जो ख़ुद को राष्ट्रवादी बताते हैं और देश की जनता का धार्मिक और राजनैतिक मार्गदर्शन भी कर रहे थे। सक्रिय आतंकवादियों के अलावा एक बड़ी तादाद उन लोगों की है जो कि उन्हें मदद मुहैया कराते हैं। मदद मुहैया कराने वालों में वे लोग भी हैं जिन पर ग़द्दारी का शक आम तौर पर नहीं किया जाता।
‘लिमटी खरे‘ का लेख इसी संगीन सूरते-हाल की तरफ़ एक हल्का सा इशारा कर रहा है.
ग़द्दारों से पट गया हिंदुस्तान Ghaddar

मृतकों के प्रति संवेदनाएं प्रेषित कर रहे हैं हिंदी ब्लॉगर्स

संस्कृत पर ब्लॉग जगत की पहली खोजी रिपोर्ट

  केरल के मंदिर से 1 लाख करोड़ से ज़्यादा का ख़ज़ाना मिला है और दीगर मंदिरों में लाखों करोड़ के ख़ज़ाने हैं। शंकराचार्य सोने के सिंहासन पर बैठते हैं और पूरी दुनिया में वह अकेले आदमी हैं जिसके पास सोने का सिंहासन है। जब वह मरते हैं तो उन्हें स्नान भी सोने के तख्ते पर दिया जाता है।
एक तरफ़ तो इन धर्म स्थलों के पास इतने ख़ज़ाने हैं और दूसरी तरफ़ हाल यह है कि
संस्कृत का दैनिक समाचार पत्र पैसे की तंगी का शिकार है।
जब माल भी है और ख़र्च करने के लिए मद भी है तो आज तक मंदिरों का यह धन संस्कृत के उत्थान में क्यों न लगाया गया ?
मंदिर और संस्कृत के नाम पर राजनीति करने वाले कहां हैं ?
वे आखि़र क्या कर रहे हैं ?
जब यह देखने के लिए ब्लॉग्स टटोले गए तो यह देखकर ताज्जुब हुआ कि वतन के राष्ट्रवादी रखवाले संस्कृत के बजाय हत्या के आरोपियों को संरक्षण दे रहे हैं।
आप भी देख सकते हैं और देखना चाहिए ताकि आप जान सकें कि देश के पास माल भी और मद भी है लेकिन सही मद में माल को तरीक़े से ख़र्च करने वाले बहुत ही कम हैं और वे तो हैं ही नहीं जो दावा करते हैं कि हुकूमत हमारी ही होनी चाहिए।

भाजपा विधायक आशा सिन्हा की गाड़ी से 9 हत्यारोपी गिरफ्तार

इन लोगों के पास संस्कृत दैनिक दो दान देने के लिए तो पैसे निकलते नहीं हैं लेकिन
स्वामी अग्निवेश को क़त्ल करने के लिए 10 लाख रूपया देने का ऐलान कर दिया।

आप ख़ुद सोचिए !!!