शिखा कौशिक
रविवार, 17 जुलाई 2011
.व्यक्तिगत हित के स्थान पर सामूहिक हित को महत्त्व
''भारतीय ब्लॉग समाचार '' ब्लॉग पर केवल ब्लॉग से सम्बंधित खबरे प्रकाशित की जाएँगी .इसे निजी वार्तालाप ;आक्रोश ,क्षमा प्रार्थना आदि पोस्ट का मंच न बनायें .अनुशासन व् नियमों को दबंगई का नाम न दे .भावुकता विचारों की प्रखरता को अवरूद्ध कर देती है .कुछ पोस्ट इस ब्लॉग की गरिमा व् उदेश्य के अनुरूप नहीं हैं -इसलिए हटाई जा रही हैं .ये लेखन की स्वतंत्रता पर आघात नहीं है -यह मात्र इस ब्लॉग के उदेश्यों व् नियमों का पालन करने का प्रयास है .व्यक्तिगत हित के स्थान पर सामूहिक हित को महत्त्व देते हुए इस कार्यवाही को अंजाम दिया जा रहा है .सभी सम्मानित सदस्यों से आग्रह है कि भविष्य में इन बातों का ध्यान रखें -*इस ब्लॉग पर ब्लॉग-जगत से सम्बंधित ब्लॉग-पोस्ट ही प्रकाशित करें .
शनिवार, 16 जुलाई 2011
क्या है किसी नेता में इतना दम ?
क्या है किसी नेता में इतना दम ? केवल एक सच्चा ब्लोगर ही दिखा सकता है हमारे नेताओं को आइना .ये हैं ''रोहित सिंह '.इनके ब्लॉग का नाम है -''बेबाक राय '' .इन्होने घोषित की है अपनी संपत्ति खुलेआम अपने ब्लॉग पर .इनके ब्लॉग का URL है -''http://rohitbanarasi.blogspot.कॉम''
shikha kaushik
शुक्रवार, 15 जुलाई 2011
नए प्रबंध मंडल का स्वागत करे
भारतीय ब्लॉग समाचार के सञ्चालन के लिए एक प्रबंध मंडल का गठन किया गया था. कुछ अपरिहार्य कारणों से उक्त गठन निरस्त करना पड़ा, इस सम्बन्ध में यदि कोई सज्जन चाहे तो व्यक्तिगत रूप से जानकारी ले सकता है. हम चाहते है की इस मंच की जिम्मेदारी वे लोग ही उठाये जो अपना निजी ब्लॉग संचालित करते हैं. नई जोश और नई चुनौतियों के साथ .... नए मंडल के पद और कार्य इस प्रकार हैं.
शिखा कौशिक जी -- प्रधान संपादक .. आपके पास इस मंच का पूर्ण अधिकार होगा. आप किसी भी लेखक को जोड़ या हटा सकती है. किसी भी खबर को सम्पादित कर सकती है या नियम के विपरीत होने पर हटा सकती है, मंच को बेहतर बनाने के लिए आप हमें सुझाव दे सकती है.
सह-संपादक -- कुणाल वर्मा व सौरभ दूबे ---- आपकी जिम्मेदारी यह है की आप दोनों लोग शिखा जी का सहयोग करेंगे. किसी भी लेख के आपत्तिजनक होने पर आप संशोधन या हटाने के सम्बन्ध में प्रधान संपादक से विचार-विमेश करेंगे.
सलाहकार संपादक --- आशुतोष नाथ तिवारी , एस एम मासूम , इंजी. सत्यम शिवम्, सलीम खान --- आप सभी लोग वरिष्ठ व अनुभवी ब्लोगर है. आपके सुझाव के अभिलाषी हम भी सदैव रहते हैं. आप लोगो से अनुरोध है की समय समय पर अपने अनुभवों से संपादको को सुझाव देते रहे.
आप सभी को शुभकामना.
शिखा कौशिक जी -- प्रधान संपादक .. आपके पास इस मंच का पूर्ण अधिकार होगा. आप किसी भी लेखक को जोड़ या हटा सकती है. किसी भी खबर को सम्पादित कर सकती है या नियम के विपरीत होने पर हटा सकती है, मंच को बेहतर बनाने के लिए आप हमें सुझाव दे सकती है.
सह-संपादक -- कुणाल वर्मा व सौरभ दूबे ---- आपकी जिम्मेदारी यह है की आप दोनों लोग शिखा जी का सहयोग करेंगे. किसी भी लेख के आपत्तिजनक होने पर आप संशोधन या हटाने के सम्बन्ध में प्रधान संपादक से विचार-विमेश करेंगे.
सलाहकार संपादक --- आशुतोष नाथ तिवारी , एस एम मासूम , इंजी. सत्यम शिवम्, सलीम खान --- आप सभी लोग वरिष्ठ व अनुभवी ब्लोगर है. आपके सुझाव के अभिलाषी हम भी सदैव रहते हैं. आप लोगो से अनुरोध है की समय समय पर अपने अनुभवों से संपादको को सुझाव देते रहे.
आप सभी को शुभकामना.
बुधवार, 13 जुलाई 2011
कहाँ कहाँ छिपे हैं आतंकवादियों के मददगार अर्थात ग़ददार ?
मुंबई में हुए बम ब्लास्ट को लेकर ब्लॉगर्स में बहुत ग़म और ग़ुस्सा है । उनका कहना हैकि
देश के दुश्मनों के लिए काम करने वाले ग़द्दारों को चुन चुन कर ढूंढने की ज़रूरत है और उन्हें सरेआम चैराहे पर फांसी दे दी जाए। चुन चुन कर ढूंढना इसलिए ज़रूरी है कि आज ये हरेक वर्ग में मौजूद हैं। इनका नाम और संस्कृति कुछ भी हो सकती है, ये किसी भी प्रतिष्ठित परिवार के सदस्य हो सकते हैं। पिछले दिनों ऐसे कई आतंकवादी भी पकड़े गए हैं जो ख़ुद को राष्ट्रवादी बताते हैं और देश की जनता का धार्मिक और राजनैतिक मार्गदर्शन भी कर रहे थे। सक्रिय आतंकवादियों के अलावा एक बड़ी तादाद उन लोगों की है जो कि उन्हें मदद मुहैया कराते हैं। मदद मुहैया कराने वालों में वे लोग भी हैं जिन पर ग़द्दारी का शक आम तौर पर नहीं किया जाता।
‘लिमटी खरे‘ का लेख इसी संगीन सूरते-हाल की तरफ़ एक हल्का सा इशारा कर रहा है.
ग़द्दारों से पट गया हिंदुस्तान Ghaddar
मृतकों के प्रति संवेदनाएं प्रेषित कर रहे हैं हिंदी ब्लॉगर्स
देश के दुश्मनों के लिए काम करने वाले ग़द्दारों को चुन चुन कर ढूंढने की ज़रूरत है और उन्हें सरेआम चैराहे पर फांसी दे दी जाए। चुन चुन कर ढूंढना इसलिए ज़रूरी है कि आज ये हरेक वर्ग में मौजूद हैं। इनका नाम और संस्कृति कुछ भी हो सकती है, ये किसी भी प्रतिष्ठित परिवार के सदस्य हो सकते हैं। पिछले दिनों ऐसे कई आतंकवादी भी पकड़े गए हैं जो ख़ुद को राष्ट्रवादी बताते हैं और देश की जनता का धार्मिक और राजनैतिक मार्गदर्शन भी कर रहे थे। सक्रिय आतंकवादियों के अलावा एक बड़ी तादाद उन लोगों की है जो कि उन्हें मदद मुहैया कराते हैं। मदद मुहैया कराने वालों में वे लोग भी हैं जिन पर ग़द्दारी का शक आम तौर पर नहीं किया जाता।
‘लिमटी खरे‘ का लेख इसी संगीन सूरते-हाल की तरफ़ एक हल्का सा इशारा कर रहा है.
ग़द्दारों से पट गया हिंदुस्तान Ghaddar
मृतकों के प्रति संवेदनाएं प्रेषित कर रहे हैं हिंदी ब्लॉगर्स
संस्कृत पर ब्लॉग जगत की पहली खोजी रिपोर्ट
केरल के मंदिर से 1 लाख करोड़ से ज़्यादा का ख़ज़ाना मिला है और दीगर मंदिरों में लाखों करोड़ के ख़ज़ाने हैं। शंकराचार्य सोने के सिंहासन पर बैठते हैं और पूरी दुनिया में वह अकेले आदमी हैं जिसके पास सोने का सिंहासन है। जब वह मरते हैं तो उन्हें स्नान भी सोने के तख्ते पर दिया जाता है।
एक तरफ़ तो इन धर्म स्थलों के पास इतने ख़ज़ाने हैं और दूसरी तरफ़ हाल यह है कि
संस्कृत का दैनिक समाचार पत्र पैसे की तंगी का शिकार है।
जब माल भी है और ख़र्च करने के लिए मद भी है तो आज तक मंदिरों का यह धन संस्कृत के उत्थान में क्यों न लगाया गया ?
मंदिर और संस्कृत के नाम पर राजनीति करने वाले कहां हैं ?
वे आखि़र क्या कर रहे हैं ?
जब यह देखने के लिए ब्लॉग्स टटोले गए तो यह देखकर ताज्जुब हुआ कि वतन के राष्ट्रवादी रखवाले संस्कृत के बजाय हत्या के आरोपियों को संरक्षण दे रहे हैं।
आप भी देख सकते हैं और देखना चाहिए ताकि आप जान सकें कि देश के पास माल भी और मद भी है लेकिन सही मद में माल को तरीक़े से ख़र्च करने वाले बहुत ही कम हैं और वे तो हैं ही नहीं जो दावा करते हैं कि हुकूमत हमारी ही होनी चाहिए।
स्वामी अग्निवेश को क़त्ल करने के लिए 10 लाख रूपया देने का ऐलान कर दिया।
आप ख़ुद सोचिए !!!
एक तरफ़ तो इन धर्म स्थलों के पास इतने ख़ज़ाने हैं और दूसरी तरफ़ हाल यह है कि
संस्कृत का दैनिक समाचार पत्र पैसे की तंगी का शिकार है।
जब माल भी है और ख़र्च करने के लिए मद भी है तो आज तक मंदिरों का यह धन संस्कृत के उत्थान में क्यों न लगाया गया ?
मंदिर और संस्कृत के नाम पर राजनीति करने वाले कहां हैं ?
वे आखि़र क्या कर रहे हैं ?
जब यह देखने के लिए ब्लॉग्स टटोले गए तो यह देखकर ताज्जुब हुआ कि वतन के राष्ट्रवादी रखवाले संस्कृत के बजाय हत्या के आरोपियों को संरक्षण दे रहे हैं।
आप भी देख सकते हैं और देखना चाहिए ताकि आप जान सकें कि देश के पास माल भी और मद भी है लेकिन सही मद में माल को तरीक़े से ख़र्च करने वाले बहुत ही कम हैं और वे तो हैं ही नहीं जो दावा करते हैं कि हुकूमत हमारी ही होनी चाहिए।
भाजपा विधायक आशा सिन्हा की गाड़ी से 9 हत्यारोपी गिरफ्तार
इन लोगों के पास संस्कृत दैनिक दो दान देने के लिए तो पैसे निकलते नहीं हैं लेकिनस्वामी अग्निवेश को क़त्ल करने के लिए 10 लाख रूपया देने का ऐलान कर दिया।
आप ख़ुद सोचिए !!!
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