रविवार, 3 जनवरी 2016

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): सफर 2015 से 2016 का...

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): सफर 2015 से 2016 का...: 2016 आ गया। यह साल कैसा होगा, यह तो समय के गर्भ में हैं लेकिन हर कोई अपने अपने अंदाज में इसकी व्याख्या करने में लगा हुआ है। कोई खुद को २०...

सोमवार, 7 दिसंबर 2015

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): इस पर बोलिए हुजूर...

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): इस पर बोलिए हुजूर...: लोकसभा में सांसद अभिषेक सिंह बड़े दिनों बाद टीवी पर लोकसभा की कार्रवाई का सीधा प्रसारण देखा, देखने की वजह थी, सांसद (राजनांदगांव) कार्य...

गुरुवार, 31 जुलाई 2014

पत्थरों के शहर में जीते हैं सब
और जो हवा वो पीते हैं
उससे अब तक तो सबको जम जाना था
किन्तु ऐसा कभी भी नहीं हुआ
कि जीता-जीता अचानक कोई जम जाए
असल में नकली रिश्तों के बीच जीते हुए सबके
दिल ही ऐसे पत्थर हो जाया करते हैं कि फिर
देह का पत्थर हो जाना कोई मायने नहीं रखता
पत्थर कदम-कदम पर मिलते हैं
बाधाओं के रूप में और नफरत के रूप में 
जिन्दगी की इस बहती हुई नदी में
हमारा हर गलत कदम पत्थर ही होता है
किसी न किसी की राह में
यहाँ तक कि खुद हमारी ही राह में
अक्सर दिखाई देते हुए पत्थरों से
न दिखाई देने वाले पत्थर ज्यादा खतरनाक होते हैं
किन्तु उन्हीं पर हमारा ध्यान नहीं जा पाता !!
और जब ध्यान जाता है,पत्थर बहुत बड़े हो चुके होते हैं
धरती पर के हमारे कुनबे की आपसी कलह और नफरत
और हवा-पानी आदि सब कुछ के विषैले हो जाने
हमारे बीच इन पत्थरों के चट्टान हो जाने की कहानी है
जिन पत्थरों से डरने-टूटने और भय की बातें करते हुए हम
उन्हीं पत्थरों की भयावह चट्टानों पर खड़े
अब न तब गहरी घाटियों में समा जाने वाले हैं हम
और आश्चर्य कि हम अब तक तो ये भी नहीं जानते !!??

शनिवार, 3 अगस्त 2013

''दिल की धड़कन हिंदुस्तान ब्लोगर सम्मान ''

''दिल की धड़कन हिंदुस्तान ब्लोगर सम्मान ''
Animated Indian Flag
''दिल की धड़कन हिंदुस्तान ब्लोगर सम्मान ''

''सिन्दूरी सुबह है उजली हर रात है 
अपने वतन की तो जुदा हर एक बात है ''

    ऐसे ही भावों को अपने शब्दों में लिख भेजें १४ अगस्त २०१३ तक केवल इस इ मेल पर  [shikhakaushik666@hotmail.com और सर्वोतम अभिव्यक्ति के लिए पायें प्यारा सा उपहार !
शब्द सीमा -५१ शब्दों में ही समेटें अपने भारत के प्रति प्यार 

 नियम व् शर्ते
*अपनी प्रविष्टि  केवल इस इ मेल पर प्रेषित करें [shikhakaushik666@hotmail.com].अन्यत्र प्रेषित प्रविष्टि प्रतियोगिता का हिस्सा न बन सकेंगी .प्रविष्टि  के साथ अपना पूरा पता सही सही भेंजे .

* प्रतियोगिता आयोजक का निर्णय ही अंतिम माना जायेगा .इसे किसी भी रूप में चुनौती नहीं दी जा सकेगी .

*प्रतियोगिता किसी भी समय ,बिना कोई कारण बताये  रद्द की जा सकती है .

* विजेता को एक प्यारा सा  पुरस्कार  प्रदान किया जायेगा .
*उत्तर भेजने की अंतिम तिथि १४ अगस्त   २०१३ है .
*प्रतियोगिता परिणाम के विषय में अंतिम तिथि के बाद इसी ब्लॉग [हम हिंदी चिट्ठाकार हैं ] पर सूचित कर दिया जायेगा .


शिखा कौशिक 'नूतन '
[व्यवस्थापक -] 
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं ]

सोमवार, 8 जुलाई 2013

भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -3

Young Woman Stock Photo

एक नारी होकर आपने कैसे किया पुरुष समाज का सामना ?क्या आप दे पाई किसी कुप्रथा को चुनौती  ?और यदि आप हैं पुरुष तो आपने कैसे दिया किसी नारी का साथ किसी कुप्रथा से लड़ने में ? दो सौ शब्दों की सीमा में लिख दीजिये अपना संस्मरण .यही है -''भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -3

नियम व् शर्ते
*अपनी प्रविष्टि  केवल इस इ मेल पर प्रेषित करें [shikhakaushik666@hotmail.com].अन्यत्र प्रेषित प्रविष्टि प्रतियोगिता का हिस्सा न बन सकेंगी .प्रविष्टि  के साथ अपना पूरा पता सही सही भेंजे .
* प्रतियोगिता आयोजक का निर्णय ही अंतिम माना जायेगा .इसे किसी भी रूप में चुनौती नहीं दी जा सकेगी .
*प्रतियोगिता किसी भी समय ,बिना कोई कारण बताये  रद्द की जा सकती है .
* विजेता को ''चन्दन का सौरभ '' पुस्तक  की एक प्रति पुरस्कार  स्वरुप प्रदान की जाएगी .
*उत्तर भेजने की अंतिम तिथि ३१ अगस्त   २०१३ है .
*प्रतियोगिता परिणाम के विषय में अंतिम तिथि के बाद इसी ब्लॉग पर सूचित कर दिया जायेगा .

शिखा कौशिक 'नूतन'
[व्यवस्थापक -भारतीय नारी ब्लॉग ]

बुधवार, 3 जुलाई 2013

भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता -२ परिणाम [विजेता-सुश्री पुनीता सिंह ]

  भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता  -२ परिणाम [विजेता-सुश्री पुनीता  सिंह ]

Congratulations Flowers

इस प्रतियोगिता में कुल छः प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई -
१ -सुश्री पुनीता सिंह 
२-सुश्री शांति पुरोहित 
३-डॉ.सारिका मुकेश 
४-सुश्री शालिनी कौशिक 
५-सुश्री रेखा जोशी 
६-सुश्री शशि पुरवार

सभी प्रतिभागियों ने सर्वश्रेष्ठ  लेखन का परिचय देते हुए अपने पक्ष में विजेता की उपाधि प्राप्त करने का प्रयास किया पर बाज़ी मार ले गयी हैं सुश्री पुनीता  सिंह जी .पुनीता जी ने शब्द सीमा को ध्यान में रखते हुए गागर में सागर भर दिया .पुनीता जी को विजेता बनने पर भारतीय नारी ब्लॉग परिवार की ओर से हार्दिक बधाई .पुरस्कार स्वरुप -साझा काव्य संग्रह -'' खामोश ख़ामोशी और हम'' की एक प्रति उनके द्वारा बताये गए पते पर प्रेषित शीघ्र कर दी जाएगी यदि पुनीता जी के पते में कोई परिवर्तन हुआ है तो वे शीघ्र मेरे मेल [shikhakaushik666@hotmail.com] पर सूचित करें .अन्य प्रतिभागियों को भी निराश  होने की जरूरत नहीं क्योंकि अगली ब्लॉग प्रतियोगिता भी शीघ्र घोषित की जाएगी .

शुभकामनाओं के साथ 
शिखा कौशिक 'नूतन' 
[व्यवस्थापक -भारतीय नारी ब्लॉग ] 

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

कट्टरवादी व्यक्ति ही सहिष्णु हो सकता है



कभी कभी कुछ शब्दों का इस्तेमाल बार बार गलत सन्दर्भ में होने के कारण उसका अर्थ ही बदल जाता है |जिस प्रकार से फतवा और जिहाद का गलत इस्तेमाल हुआ है उसी प्रकार से कट्टरवाद का इस्तेमाल भी गलत ही होता है |

फतवा शब्द सुनते ही ऐसा लगता है की किसी मुल्ला ने अपने मुसलमान पे किसी हुक्म को मानने के लिए ज़बरदस्ती की होगा | जबकि इस्लाम का कानून है दीन में में कोई ज़बर्दस्ती नहीं है| आप किसी को यह तो बता सकते हैं की इस्लाम की नज़र में किसी काम के लिए अल्लाह का क्या हुक्म है लेकिन आप ज़बरदस्ती किसी इंसान को मानने के लिए नहीं कर सकते |

इसी प्रकार से जिहाद और मुजाहिदीन शब्द सुनते ही ऐसा लगता है किसी आतंकवादी हमले की बात हो रही है |जबकि अपने स्वयं के भीतर की बुराइयों के खिलाफ लड़ने को जिहाद कहा जाता है या फिर अपनी रक्षा में हथियार उठाने को जिहाद कहते हैं |

इसी प्रकार कट्टरवाद शब्द ध्यान में आते ही ऐसा लगता है की कोई अड़ियल मुसलाम या हिन्दू है जो सामने वाले के धर्म को बुरा कहना और उसकी बुराई निकलना अपना धर्म समझता है जबकि कट्टरवाद का शाब्दिक अर्थ है, अपनी बुनियाद, सभ्यता, संस्कारों से कट्टरता के साथ जुड़े रहना |

शब्द इस्लाम भी ज़बान पे आते ही जो शब्द पहले ध्यान आता है वो है आतंकवाद और कट्टरवाद | ‘इस्लाम’ शब्द असल मैं शब्द तस्लीम है, जो शांति से संबंधित है|
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जब से बॉब २०१३  की वोटिंग शुरू हुई है ब्लॉगजगत के एक ऐसे गुट में हलचल सी शुरू हो गयी है जो खुद को इस ब्लॉगजगत का खम्बा बना कर पेश किया करता था  । इस चुनाव ने उनको ऐसा आईना दिखाया की उन्हें यही समझ नहीं आ रहा की हँसे या रोएँ ।

यह वही लोग हैं जिन्होंने खुद को बड़ा ब्लॉगर और ब्लॉगजगत का जानकार साबित करने के लिए पिछले २ सालों  में न जाने पब्लिसिटी के कितने हथकंडे अपनाये लेकिन ज्ञान की कमी और लेखनी में दम न होने के कारण उनका नाम केवल उनके मित्रों तक ही सीमित रह गया ।

ताज्जुब की बात तो यह है की अब
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नवरात्र  की बधाई व शुभकामनाएं

इस समय 'बॉब्स अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार-2013', चर्चा में है। पुरस्‍कार के के लिए ऑनलाइन वोटिंग कराई जा रही है |इस प्रतियोगिता का परिणाम 07 मई को घोषित किया जाएगा और विजेताओं को ये पुरस्‍कार 18 जून 2013 को जर्मनी में प्रदान किए जाएंगे। यह सभी ब्लॉग जब चुने गए हैं तो कुछ ख़ास अवश्य होंगे | कुछ हो या न हो लेकिन इनमे विविधता अवश्य है |

मुझे इस बात की ख़ुशी है की चलो सही मायने में ईमानदारी से पुरस्कार की शुरुआत तो हुई और इस ब्लॉगजगत को टिपण्णी माफियाओं और गुटबंदी जैसे बीम
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मैं राजनीति पे नहीं लिखा करता लेकिन कभी कभी कुछ ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं कि लिखना ही पड़ता है | राष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मियां के बाद अब प्रधानमंत्री पद के लिए जोड़ तोड़ शुरू हों चुकी है|

यह हमारी बदकिस्मती है कि हमने इस विश्व को धर्मो, रंगों और नस्लों में बाँट दिया है और उसी को आधार बना के सत्ता पे कब्जा करने की कोशिश होती रहती है |

प्रधान मंत्री कोई भी बने लेकिन ऐसा होना चाहिए जिसे इंसानियत का धर्म पता हों | किसी भी देश को चलाने वाले के लिए यह आवश्यक है की वो अपने देश के सभी नागरिको को स
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जौनपुर जो “शिराज़-ए-हिंद“ के नाम से भी मशहूर हैं, भारत के उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। जौनपुर एक शतक तक मध्यकाल में शर्की शासकों की राजधानी रह चुका है |यह शहर गोमती नदी के दोनों तरफ़ फैला हुआ है। गुप्तकालीन मंदिर ,और मुद्राओं का यहाँ पे पाया जाना इस ओर भी इशारा करता है कि गुप्तकाल में यह नगर व्यापार का केंद्र रहा होगा| 1394 के आसपास मलिक सरवर ने जौनपुर को शर्की साम्राज्य के रूप में स्थापित किया और इसे अपने स्वतंत्र राज्य की राजधानी(1394-1479) बनाया | जौनपुर इब्राहिमशाह शर


रविवार, 14 अप्रैल 2013

''भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -2

''भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -2 


जीवन में किस 'भारतीय नारी ' ने किया है आपको सर्वाधिक प्रभावित ? दो सौ शब्दों की सीमा में लिख दीजिये अपना संस्मरण .यही है -''भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -2 

    नियम व् शर्ते
*अपनी प्रविष्टि  केवल इस इ मेल पर प्रेषित करें [shikhakaushik666@hotmail.com].अन्यत्र प्रेषित प्रविष्टि प्रतियोगिता का हिस्सा न बन सकेंगी .प्रविष्टि  के साथ अपना पूरा पता सही सही भेंजे .
* प्रतियोगिता आयोजक का निर्णय ही अंतिम माना जायेगा .इसे किसी भी रूप में चुनौती नहीं दी जा सकेगी .
*प्रतियोगिता किसी भी समय ,बिना कोई कारण बताये  रद्द की जा सकती है .
* विजेता को '' खामोश  ख़ामोशी और हम ''काव्य संग्रह की एक प्रति पुरस्कार  स्वरुप प्रदान की जाएगी .
*उत्तर भेजने की अंतिम तिथि ३० मई  २०१३ है .
*प्रतियोगिता परिणाम के विषय में अंतिम तिथि के बाद इसी ब्लॉग पर सूचित कर दिया जायेगा .


शिखा कौशिक 'नूतन '

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

तेजाबी तानों से बेहाल पीड़ित परिवार -तेजाबी हमलावर अब तक फरार

कांधला में २ अप्रैल को हुई तेजाबी घटना का कोई भी हमलावर आज दसस्वें  दिन तक भी नहीं पकड़ा गया है .कल कॉग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जी ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर हर संभव मदद व् अपराधियों को जल्द से जल्द पकडे जाने का आश्वासन दिया है .परसों शाम मैं भी सुश्री शालिनी कौशिक जी व् हमारे पिता जी के मित्र श्री प्रेमचंद गुप्ता जी के साथ पीड़ित परिवार के घर पर उनके परिजनों से मिली .नौ बहनों में दूसरे नंबर की बहन अंजुमन दीदी का गला पड़ा हुआ था .इस घटना के बाद से उनके परिवार का  जीवन नर्क हो गया है .उनका कहना था कि पुलिस जांच के नाम पर उनके ही फोन टेप कर रही है और तंज कस रही कि इतने फोन व् एस.एम्.एस तो हमारे भी नहीं आते .सबसे छोटी बहन जो 11  कक्षा की छात्रा है घटना के दिन से स्कूल नहीं गयी है .पुलिस उससे व् उसके साथ के बच्चों से भी पूछताछ कर प्रताड़ित कर रही है ..उनका कहना है कि पूरी बिरादरी में ये घटना एक तफरी का विषय बन गया है .कोई आपस में बात करता हुआ कहता है कि -हाय कैसी दिखती हैं वे लड़कियां ?और कुछ लोग तो सर.गंगाराम हॉस्पिटल में जीवन -मृत्यु से लडती उनकी बहन के लिए यहाँ तक कह रहे हैं कि वो पट्टी बंधकर नाटक कर रही है .तेजाबी हमले की शिकार लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं .अंजुमन दीदी का कहना है कि -सब यह प्रदर्शित कर रहें हैं कि वे तो आब- ए -जम-जम में नहाये हुए पाक-साफ हैं और पीड़ित परिवार तेजाब में नहाया हुआ गन्दा परिवार है . कोई कहता है कि इन लड़कियों ने नौकरी पाने के लिए यह नाटक रचा है और कोई कहता है कि -ये लडकिया उन लड़कों से बात करती आ रही थी .तेजाबी हमले की शिकार बहनों में से एक पहले से ही सर्वाइकल  दर्द की शिकार है उससे देखते ही मन भर आया .अंजुमन दीदी का गुस्सा इस सारी बिरादरी से है जिसने ऐसे कठिन समय में उनका साथ छोड़  दिया  है .हमने जब पूछा कि आपको किसी पर शक है तो उनका कहना था कि -हमारे लिए तो सारी दुनिया ही दुश्मन हो रही है किसका नाम लें .पीड़ितों की माता जी ने बताया कि -लडकिया बहुत डरी हुई हैं और रात में डरकर जाग जाती हैं .सब हालात देख व् सुनकर मैं व् शालिनी जी इसी निष्कर्ष पर पहुंचें कि यदि पुलिस सही ढंग से कार्यवाही करती तो अब तक दोनों तेजाबी हमलावर जेल के भीतर होते और इन हमलावरों से बढ़कर है हमारा तेजाबी मानसिकता वाला ये समाज जो पीड़ित परिवार को अपने तेजाबी विचारों से हर घडी  जला रहा .
हमलावर शीघ्र पकडे जाये और उन्हें फाँसी की सजा मिले व् पीड़ित बहने  शीघ्र   इस सदमे व् तेजाबी घावों से निजात पायें ऐसी कामनाओं के साथ मैं अपनी इस ब्लॉग पोस्ट को समाप्त करती हूँ .
       शिखा कौशिक 'नूतन '

बुधवार, 3 अप्रैल 2013

ब्लॉग पहेली -३ ९ उत्तर इस लिंक पर ही दें

 ब्लॉग पहेली -३ ९ 
उत्तर इस लिंक पर ही दें -'ब्लॉग पहेली चलो हल करते हैं '
 Crown : illustration gold royal crown insulated on white background

यह पोस्ट किस ब्लॉग पर प्रकाशित की गयी है ? क्या बता सकेंगें आप ?
बता पाये तो पायेंगें सिर पर विजेता का ताज ! नहीं साँच को आँच !
*शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक * * * श्री *ओंकारेश्वर -- भाग २ * *शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक


         नियम वही ....शुभकामनाओं के साथ 
शिखा कौशिक 'नूतन '

मंगलवार, 28 अगस्त 2012

चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय !!

[1]
सुनो....सुनो.....सुनो....सुनो....
सब कोई मेरी खामोशी को सुनो 
मैं कुछ नहीं बोलूंगा 
चाहे तुम सब कुछ भी कहो 
चाहे तुम मुझे हरामी कहो 
या कहो कुछ भी और 
कि मैं चोरों का हूँ सरदार 
चाहे कहो कि मैं हूँ मक्कार 
तुम चाहो तो मुझे 
देश द्रोही भी कह सकते हो 
मगर मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा 
क्योंकि अगर मैंने कुछ भी कहा 
तो हो जायेंगे बहुत जने बेनकाब !!
मेरी जबान अगर खुल गयी तो 
निकल जाएगी कईयों की जान 
इसीलिए 
मेहरबान-कदरदान-मेजबान-मेहमान 
आप इस नाचीज़ को चाहे जो कह लो 
बन्दा मुस्कुराता ही रहेगा 
ना आपको कुछ कहेगा ना मैडम को 
जो जैसा चल रहा है वैसा ही चलेगा 
कुछ ना बदला है ना बदलेगा 
आप सब भी ऐसा ही कुछ करो ना 
मेरी तरह निर्लिप्त हो जाओ ना सब कुछ से 
फिर देखना आप सब कि कैसी शान्ति होती है 
आप सब शान्ति ही चाहते हो ना ?
घबराओ मत,हम जो कुछ भी कर रहे हैं 
जल्द ही आप सब देखना 
मरघट जैसी शान्ति छा जाएगी सब तरफ !! 
[2]
तो बोलो,
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय 
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय !!
दुनिया बड़ी खिलाड़ी,हम रह गए अनाडी
काहे को लेते हो टेंशन ओ मेरे प्यारे भाय 
जितना भी लूटे ये देश को तो लूट लेने दो ना 
वैसे भी तो खायेगा कोई,इनको ही खाने दो ना
जब कुछ भी नहीं है तुम सबकी अपनी औकात 
तब काहे को करते हो हल्ला,मरते तो हो तुम बेबात 
सब मिल के नाचो गाओ और सारे मिल के बोलो 
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय 
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय !!
गाडी में चलते हैं सिकंदर,हम रह गए हैं बन्दर 
मोटे चूहे खोदे देश को और हम तो हैं छुछुंदर
हम होते जाते भीतर और सारा माल उनके अन्दर 
चाहे वो खोदे खाने,या बेचें वो स्पेक्ट्रम 
जब है ही नहीं कुछ भी आवाज़ में तुम्हारी दम 
काहे को भईया फोड़ते हो नारों के ये फालतू बम
सारे ही आओ मिल कर सब आज मौज मनाओ 
देश की इस हालत का तुम भी मजाक उड़ाओ
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय  
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय !!
आओ ओ मेरे बच्चों इक कथा तुम्हें सुनाऊं 
परियों के लोक में आज मैं तुम्हें ले जाऊं 
क्या करोगे तुम भी जानकर अपने वतन की हालत 
तुम भी बनाते रहना बस अपनी खुद की ही सेहत
मरती हो गर इंसानियत तो मर जाने दो तुम उसको 
डार्लिंग तुम्हारी बैठी है बस किस करो तुम उसको 
पापा-मम्मी तुम्हारे,तुम्हारा कैरियर आगे बढाएं
कोई दुल्हन या दामाद लाकर परिवार आगे बढाएं 
तुम भला कौन हो वतन के और क्या है वतन तुम्हारा 
और है भी क्या भला कुल मिलाकर इतिहास हमारा 
आओ चलें करें कोई पार्टी रेव और नंग-धडंग गायें 
और जो करे हमारी निंदा उसे गोली मार गिराएं
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय  
चिंता-ता चिता-चिता कोई चिंता नाय !!
सोचता तो हूँ कि एकांगी सोच ना हो मेरी,किन्तु संभव है आपको पसंद ना भी आये मेरी सोच/मेरी बात,यदि ऐसा हो तो पहले क्षमा...आशा है कि आप ऐसा करोगे !!

सोमवार, 13 अगस्त 2012

सिर्फ महिला ब्लोगर्स के लिए [ ONLY FOR WOMAN BLOGGERS]


सिर्फ  महिला ब्लोगर्स के लिए [ ONLY FOR WOMAN BLOGGERS]          

ये मंच है केवल महिला ब्लोगर्स के लिए .आप साझा करें अपने जीवन  के अनुभव -सुखद -दुखद ,ब्लोगिंग से सम्बंधित अनुभव ,समस्याएं .साथी महिला ब्लोगर्स से करें अपनी परेशानी साझा .हम सब मिलकर निकालें  हल  अपनी जैसी  सभी  महिला ब्लोगर की   समस्या का .तो देर किस बात की ?जुड़ जाएँ इस मंच से आज और अभी .
                              शिखा कौशिक 

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

कृष्ण जन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं |


कृष्ण जन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं | 

जसोदा तेरा लल्ला कितना सलोना है ,
पालने में झूलता चंदा सा खिलौना .
कान्हा को बाँहों का झूला झुलाएंगे ,
मीठी मीठी लोरी सुनाकर सुलायेंगें ,
ममता की बरखा से उसको भिगोना है .
जसोदा तेरा लल्ला ....
ले गोद  कान्हा को गोकुल घुमाएंगे ,
गैय्या दिखाएंगें उपवन घुमायेंगें ,
मखमल सा कोमल ये गोकुल का छौना है .
जसोदा तेरा लल्ला .....

कहते हैं सब ये जग का खिवैय्या है ,
हमारे लिए तो बस ये कन्हैय्या है ,
ये ही हमारा रत्न-धन-सोना है .
जसोदा तेरा लल्ला ....
                         शिखा कौशिक 

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

ये फुल-टू-फटाक मस्ती लेता हुआ वतन....!!


मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!अपनी चिंताओं को इस तरह प्रकट कर रहे हैं,अगर आपको लगे कि यह वाजिब है तो हमें जगह दें ,हम आपके आभारी रहेंगे !!
ये फुल-टू-फटाक मस्ती लेता हुआ वतन....!!
              अन्ना-टीम के अनशन समाप्त होने के बाद शायद अब आगे अनशन जैसे कार्यक्रमों की संभावना कम ही दिखाई पड़ती है !,अनशन समाप्त करने की वजह प्रकट में चाहे जो भी बतायी जाए मगर अप्रकट में बहुत सारे रहस्य हैं,जिनका प्रकटीकरण अब शायद कभी नहीं हो,ऐसी संभावना भी बनती है,सबसे बड़ी बात तो यह है कि असंवेदनशील-दम्भी-हरामी और चाटुकारों से घिरे शासकों के सम्मुख बीन बजाने का फायदा भी क्या ?
               मगर यहीं पर आगे चीज़ों के उग्र रूप धारण कर लेने की संभावना भी बनती दिखाई पड़ती है !मोटी-सी बात यह है कि आज की परिस्थितियों में साधारण से साधारण चीज़ों के लिए भी,जनता को अपने निम्नतम हक़ के लिए भी सड़क पर आने को विवश होना पड़ता है तो शासकों की यह अंधेरगर्दी भला कब तक चल सकती है ?
               इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम-अन्ना जैसी प्रतिभाशाली लोगों की टीम ने अब तक सिर्फ एक सवाल भ्रष्टाचार को लेकर ही यह आन्दोलन खडा किया है,जिससे शायद शहर की जनता के सिवा किसी को कोई सरोकार नहीं है,बल्कि इस आन्दोलन के चलते अन्य बहुत सारी जन-उन्मुखी समस्याएँ और देश के अन्य कुछ हिस्सों में अन्य कुछ लोगों द्वारा किये जा रहे बहुत से अत्यंत महत्वपूर्ण आन्दोलन भी हाशिये पर डाल दिए गए हैं !
               टीम-अन्ना को अब यह मंथन करना ही होगा कि अगर सच में वो एक राजनीति-दल होने की राह में है तो देश में बेशक भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या है मगर साथ ही अन्य बहुत सारे प्रश्न भी हैं और वो प्रश्न इतने ज्यादा अहम् हैं कि ये सारे प्रश्न एक साथ ही अपने हल किये जाने की मांग करते हैं,किसानों-मजदूरोंऔरतों-बच्चों और ऐसे ही आम लोगों से सम्बंधित ऐसे हज़ारों-हज़ार सवाल हैं जो अपने अति-शीघ्र हल किये जाने की तलाश में हैं .
               अब एक प्रश्न मीडिया का भी है,विदेशी पूँजी की चकाचौंध में डूबा इतराता और अपनी पीठ आप ही ठोकता यह मीडिया आज सबसे सिरफिरा दिखाई देता है,भले ही इस मीडिया ने सैंकड़ों पर्दाफ़ाश किये हों मगर सत्ता के साथ इसके गठजोड़ को कौन नहीं जानता है और इस सांठ-गाँठ से यह क्या-क्या हासिल करता है अगर सच में जनता इसे समझ-जान जाए तो आम जनता इसे भी किसी दिन ठोक डालेगी,समझने वाले लोगों ने तो दरअसल इसका विश्वास करना भी छोड़ दिया है क्योंकि अब वो जानते हैं कि बहुत सारे पर्दाफाशों के बाद बहुत सारी बंदरबांट हुआ करती है और इस बंदरबांट के पूर्ण होते ही वही मीडिया अपना मुहं ऐसा सीम लेता है जैसे इसने कभी मूंह खोला ही नहीं था !मगर अब यह रहस्य भी अब बहुत छिपा नहीं रह गया है !
               बीजिंग ओलिम्पिक के बाद इस ओलिम्पिक तक हम ना सिर्फ खेलों में बल्कि तमाम चीज़ों में चीन नामक एक पडोसी देश के उभार को देखते आ रहे हैं !कल तक भारत से भी फिसड्डी यह देश अगर आज विश्व का सिरमौर बनने जा रहा है,बल्कि तकरीबन बन ही चुका है तो इसके पीछे ऐसा क्या है,ऐसी कौन-सी बात है जिसने सवा-डेढ़ अरब लोगों का बोझ ढ़ोते एक भूमि को सबसे आगे ला खडा कर दिया है !!और मज़ा यह है कि इसके पीछे कोई रहस्य नहीं है दोस्तों बल्कि सिर्फ एक वजह है मेहनत-मेहनत और मेहनत !!सिर्फ कार्यकुशल कर्मठता ही बेहतर परिणाम दे सकती है मगर इसके ठीक उलट हम क्या हैं काहिल-नकारा....मेहनत से जी भरकर जी चुराने वाले,सिर्फ सपने देखने और ज़रा-ज़रा सी सफलता पर फूल कर कुप्पा हो जाने वाले एक बेवजह की भीड़.....धरती पर एक बेवजह का बोझ....ज़रा अपने इस फालतुपने पर क्षण भर के लिए ही सही,मगर विचार करें हम एकाध करोड़ मीडिया से जुड़े हुए और विचारों में खुद को बड़े तीसमार खाँ समझते हुए लोग !!
                  फिलहाल टी.वी-इंटरनेट-मोबाइल-आईपॉड और अन्य एप्स के चटखारे लेता हुआ कुछ करोड़ मध्यवर्गियों का यह वतन फुल-टू-फटाक मस्ती की नींद सो रहा है,बिना यह जाने और समझे हुए कि बाकी के अरबों लोगों के साथ दरअसल क्या हो रहा है !जिस किसी भी दिन यह जागेगा और और उन अरबों प्रताड़ित लोगों के दुःख-दर्द से खुद को जोड़ेगा तभी कोई सच्ची और संभावना नज़र आती है और एक बात बता दूं अभी तो यह नज़र ही नहीं आ रही !इसलिए आन्दोलनों की परिणिति ऐसी हुई जा रही है !!
                बिना किसी दिशा के कुछ भी करना एक बहुत बड़ा पागलपन है और यह बेतुका पागलपन सबसे पहले तो यहाँ सत्ता करती है,और उससे भी बड़ा उसका विरोध करने वाले जबकि सबका स्वार्थ महज एक है कि शाम-दाम-दंड-भेद किसी भी प्रकार से अपना घर भरना !!और जब जनता को बार-बार "........"बनाकर सिर्फ सरकार बदलना भर आपका मकसद हो तो जनता आखिर कब तक खुद को ठगा जाता महसूस करके भी आपका साथ देगी....मज़ा तो यह है कि सौ अरब लोगों को तो यह तक मालूम नहीं है कि विभिन्न सरकारों द्वारा उनके लिए तरह-तरह की योजनायें लागू हैं और वो पूरी-की-पूरी या कुछ या बहुत सारे अंशों में कुछेक हजार लोगों द्वारा हाइजैक कर ली जा रहीं हैं इसमें सत्ता-दलाल-स्वयंसेवी संगठन-मीडिया और कुछ महत्वपूर्ण लोग पूरी तरह से लिप्त हैं और मैं यह सोच कर चिंतित हूँ कि जब जनता को इस भयानक "घोटाले"(इसके अर्थ को पाठक कई गुणा कर लें !!)का पता चलेगा तब वह इस सबमें लिप्त इन सब लोगों का क्या हश्र करेगी !!??

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सोचता तो हूँ कि एकांगी सोच ना हो मेरी,किन्तु संभव है आपको पसंद ना भी आये मेरी सोच/मेरी बात,यदि ऐसा हो तो पहले क्षमा...आशा है कि आप ऐसा करोगे !!

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

आज लिखने-कहने को कुछ भी नहीं है.....

आज लिखने-कहने को कुछ भी नहीं है......और कुछ है भी भीतर से कुछ भी उगलने का मन भी नहीं है....मन आज खट्टा है.....कल से ही हो चूका था 
.....अन्ना-आन्दोलन की समाप्ति की घोषणा ने लाखों-करोडों लोगों की आशाओं पर तुषारापात कर दिया है,इससे यह भी साबित है कि फेस-बुक पर हमारे टायं-टायं करने भर से हम किसी आन्दोलन का हिस्सा नहीं बन सकते....जिस किसी भी जगह पर हम हैं,उसके समर्थन में सड़क पर आ जाने पर ही वह आन्दोलन सफल हो सकता है....जो सरकार या प्रशासन सामान्य-सी नागरिक सुविधाओं को सुचारू रूप से जारी बनाए रखने के लिए अपने नागरिकों का आन्दोलन करने या सड़क पर उतरने का इंतज़ार करता है.....वो भ्रष्टाचार जैसे अपने से जुड़े अभिन्न मुद्दे पर महज कुछेक हज़ार लोगों के खड़े हो जाने पर जागेगा....!!??ऐसी अपेक्षा करना हमारी मूर्खता है.....जिसका परिणाम सामने है.....अब आगे हमारे सामने बस एक ही चारा है........करो.....या मरो... ...!! 

सोमवार, 30 जुलाई 2012

हमारे लिए इस दौर के लिए कुछ सबक.....आमीन.....!!


हमारे लिए इस दौर के लिए कुछ सबक.....आमीन.....!!
बस एक बात बता दे मेरे पगड़ी वाले भाई.....अगर तूने कोई करप्शन नहीं किया है तो ये थेथरई काहे की....लोकपाल ला दे ना.....इसमें दिक्कत क्या है भला.....जैसे मिलजुलकर राष्ट्रपति दे दिया...वैसे ही एक लोकपाल भी दे दे.... !!
एक और बात बता मेरे पगड़ी वाले भाई.....क्या जंतर-मंतर पर बैठे लोग पागल हैं....??वहशी हैं....??दरिन्दे हैं....कि राक्षस.....??....या फिर निजी रूप से तेरे दुश्मन.....??......यार क्या तू और तेरी टीम ही देश की सच्ची खेवनहार है.....??बाकी सब चोर हैं....??अरे यार.....तू इतना बड़ा पढ़ा-लिखा अर्थशास्त्री है.....काहे को ये निर्लज्जता भरी बेईमानियाँ कर रहा है यार....??.....जब सारा देश पुकार रहा है....अन्ना....अन्ना.....अन्ना.....और तू और तेरी टीम शर्म-हीन बयान दे रही है.....अरे यार कुछ तो रहम करो....देश पर नहीं तो खुद पर ही....उम्र के अंतिम पायदान पर भी क्या तुम लोगों को बुद्धि नहीं आती....!!??
एक सवाल मन को हमेशा मथता रहता है...कि जो दर्द वतन के लिए सबको होता है......वो भारत के रहनुमाओं को कभी भी क्यूँ नहीं होता....क्या वो मिटटी खाते हैं कि टट्टी.....!!?? 
अब एक बात आप सब बताईये ना दोस्तों....अगर अगर आपके पास ढेर सारा पैसा हो मगर आपके कामों के कारण आपके वतन की संसार में कोई इज्ज़त ही ना हो तो आप क्या ज्यादा पसंद करेंगे.....अपना पैसा.....या वतन की इज्ज़त ?? 
मैं अन्ना बोल रहा हूँ.....केवल सत्ता ही नहीं.....हम सब भी अपने-अपने स्तर पर तरह-तरह की हरामखोरियाँ-बेईमानियाँ और करप्शन करते हैं.....और यह समाज के प्रत्येक स्तर पर होता है.....आन्दोलन के इस चरण में अपने भीतर झाँक कर हम सब अपने भीतर देखकर अपने बारे में भी सोच लेन कि हममें से कौन कितना बड़ा कमीना है !!
आप ऐसा मत कहिये कि मैं आपलोगों के प्रति कुछ कड़े अथवा असंसदीय शब्दों का उपयोग कर रहा हूँ....सच तो यह है कि जब तक हम खुद के प्रति कड़े नहीं हो जाते.....तब तक धरती पर कोई भी आन्दोलन सार्थक नहीं हो सकता !!
सिर्फ एक मेले या मीनाबाजार की तरह कहीं किसी जगह विशेष पर भारी भीड़ कर देने से कुछ हल नहीं होने को....अगर हम नागरिक भी भ्रष्ट हैं तो लोकपाल तो क्या उसका बाप या उसके बाप का बाप भी इस देश का उद्धार नहीं कर सकता......!!
एक बात जान लीजिये मेरे देश के इज्ज़त-परस्त नागरिकों.....आज हम जो सत्ता को गालियाँ दे रहे हैं.....दिए जा रहे हैं....मगर हम खुद भी कौन से ऐसे पाक-साफ़ हैं....और ऐसा कौन सा काम हमने किया है जिससे हमारा खुद का कोई देश-प्रेम या वतनपरस्ती साबित होती है....??खुद हरामी रहकर दूसरों को उपदेश देने वाले हम....कल को सोचिये कि हमारे बच्चे ही हमसे पूछ बैठे कि "क्या पापा आप भी....??मैंने तो सोचा भी नहीं कि आप भी इन देश-द्रोहियों और हरामियों की तरह कमीने हो.....!!??".....दोस्तों सबसे पहले खुद से कुछ खड़े कीजिये...आप खुद समझ जायेंगे कि आपमें किसी आन्दोलन में शरीक होने कि योग्यता है भी कि नहीं....!!  
बड़ा मज़ा आ रहा है ना आन्दोलन करने में......मगर अगर सत्ता ने लाठियां बरसाई.....तब देखेंगे कि किस्में कितना दम है....!!दोस्तों इस देश को दरअसल आज़ादी कभी मिली ही नहीं थी....सिर्फ गोरे अंग्रेजों द्वारा काले अंग्रेजों को सत्ता का हस्तांतरण भर हुआ था....इसलिए अंग्रेजों के बनाए हुए काले कानूनों को ढोती हुईं तमाम सरकारें आज तक जनता के साथ हर स्तर पर हैवानियत भरा नंगा खेल खेलती रही !!
दोस्तों !बहुत सारे लोग इस आन्दोलन में शरीक होकर अपने सारे पुराने पापों को धो लेना चाहते हैं....वे इस आन्दोलन में शामिल होकर गंगा नहा लेने का लाभ ले लेने की फिराक में हैं....ऐसे लोगों को भी पहचानिए....और उन्हें मार भगाइए....वरना इस आन्दोलन की धार कुंद पड़ जायेगी....!!
और अंत में यही कि एक सच्चे-अच्छे एवं दुर्भावना-हीन समाज को गढ़ने के लिए खुद के भी सच्चे समर्पण की आवश्यकता होती है....ऐसा कभी भी नहीं हो सकता कि हम तो लालच-फरेब-दुर्भावना-उंच-नीच-धर्म-सम्प्रदाय की अपवित्र भावनाओं से भरे हों....और एक अच्छे समाज का बेतुका सपना देखते रहें.....हमेशा एक बात याद रखिये.....कि जिन हथियारों से आप लैस हो....वैसा ही समाज आप गढ़ पाओगे...जय-हिंद....वन्दे-मातरम्.....सत्यमेव-जयते.....!!!  
सोचता तो हूँ कि एकांगी सोच ना हो मेरी,किन्तु संभव है आपको पसंद ना भी आये मेरी सोच/मेरी बात,यदि ऐसा हो तो पहले क्षमा...आशा है कि आप ऐसा करोगे !!

रविवार, 29 जुलाई 2012

शायद अब हम कुछ भी नहीं बचा सकते.....!!??


शायद अब हम कुछ भी नहीं बचा सकते.....!!??
               बहुत अजीब हालत है मेरे मन की !!बहुत कुछ लिखना चाहता हूँ, कहना चाहता हूँ,गाना चाहता हूँ,मंचित करना  चाहता हूँ....पल-दर-पल आँखों के सम्मुख बहुत कुछ घटित होता रहता है,जो मानवता को शर्मसार और मुझे व्यथित करता रहता है,जिससे पीड़ित होकर खुद को व्यक्त करना चाहता हूँ मगर साथ ही कुछ भी लिखने में लगने वाले वक्त की अपेक्षा अपने लिखे जाने के "अ-परिणामों " पर विचार करता हूँ तो अपने लिखे हुए को बिलकुल "अ-सार्थक " पाता हूँ !!और इस कारण लेखन-कर्म मुझे एकदम से बेकार और वाहियात कर्म लगने लगता है !!
               रोज जब भी नेट पर बैठता हूँ तब कई प्रकार की वेदना होती है मन में,जो कभी भी बिलकुल से निजी समस्याओं की वजह से नहीं,बल्कि अपने आस-पास घटने वाली दुःख देने वाली घटनाओं के कारण उपजती हैं,जिन्हें मैं मिटा नहीं सकता,मिटा भी नहीं पाता...और कुछ भी नहीं बदल पाने का यह गम मुझे सालने लगता है....जी घुटने लगता है...मगर कोई उपाय भी नहीं होता मेरे पास खुद को राहत देने का...क्योंकि गैर-तो-गैर अपने भी सीधी-सच्ची और सूरज या आईने की तरह साफ़ सी चीज़ तक को नहीं मानते....कोई भी व्यक्ति महज अपने आत्ममुग्ध अहंकार की वजह से अपनी गलतियों को नहीं मानता और ना सिर्फ वो अपनी गलती नहीं मानता बल्कि सीधा-साधा यह तक भी एलान कर डालता है की मैं ऐसा ही हूँ...मेरे साथ मेरी शर्तों पर निभाना है तो ठीक...वरना मैं चला....यह थेथरई धरती के तकरीबन समस्त मानवों में है,जो दरअसल धरती की सारी समस्याओं की जड़ भी है !!
               मगर किसी समस्या का दरअसल कोई ईलाज नहीं है क्योंकि आप किसी को उसकी गलतियों की माफ़ी के लिए विवश तो दूर,उसे इस बात को मानने को भी तैयार नहीं कर सकते कि उसने कोई गलती भी है !! और इस तरह सारी धरती पर ऐसी-ऐसी बातों पर बाबा आदम के जमाने से ऐसे-ऐसे झगड़े होते चले आ रहे हैं, जिनका की मानव जाति से दूर-दूर तलक का भी नाता नहीं होना चाहिए था,मगर ना सिर्फ ऐसा होता चला आ रहा है,बल्कि ऐसा ही होता भी रहना है,तो फिर मेरे या किसी के भी किसी भी माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करने का कोई अर्थ भी है ??.....है तो भला क्या अर्थ है....??
               हर महीने की किसी तारीख पर जब  नेट का कनेक्शन ख़त्म हो जाता है तब कई दिनों तक इसी उधेड़-बून में रहता हूँ कि उसे फिर से भरवाऊँ कि ना भरवाऊँ....क्योंकि मेरा जो काम है वो सिर्फ मेरे कुछ भी व्यक्त-भर कर देने से खत्म नहीं हो जाता....दरअसल मेरा काम तो मेरे खुद को व्यक्त करने के बाद ही शुरू होता है।....जो कि कभी शुरू ही नहीं होता.....मेरे भीतर वेदना चलती रहती है....चलती ही रहती है !!
              इस वेदना का क्या करूँ मैं....लोगों की आत्मा को जगाने के प्रयास में लगी मेरी अभ्यर्थना....मेरा लेखन अपने किसी लक्ष्य को पाता नहीं प्रतीत होता ऐसे में फेसबुक का क्या करना है...ब्लॉगों का क्या करना है...या अन्य किसी भी अभिव्यक्ति का क्या होना है.....और जब कुछ होना ही नहीं है...तब मुझे भी भला क्यूं होना है......इन्हीं सब छिछली बातों में मैं झूठ-मुठ का वक्त शायद जाया करता आया हूँ,और शायद मरने तक ऐसा ही चलता भी रहेगा.....!!
             ऐसे में, मैं नहीं जानता कि मैं धरती पर अपने होने का क्या करूँ......मैं नहीं जानता कि हम सब धरती पर खुद को धोने के अलावा अपने होने से अपने होने का क्या साबित कर रहें,जबकि धरती आदमी से कलंकित है......और मानवता भी आदमी से शर्मसार है....!!??

भाई आमिर.....इन बुलंद हौसलों को सलाम....!!


         भाई आमिर.....इन बुलंद हौसलों को सलाम....!!
       एक बार फिर आमिर मैं तुम्हारे प्रोग्राम को देखते हुए कई बार भीतर ही भीतर रोता रहा,ये आंसू किन्हीं लोगों के जज्बे के,ईमानदारी के,हिम्मत के और अपने काम द्वारा समाज के सम्मुख एक मिसाल बन जाने वाली प्रेरणा के लिए थे,मैं रोया इस बात पर भी कि नौ साल का एक बच्चा,सब्जी बेचने वाली कोई औरत,कोई अशक्त-विकलांग व्यक्ति,तो कोई अशिक्षित व्यक्ति या कोई बूढ़ा-बुजुर्ग व्यक्ति किसी दर्द या समस्या को सामने पाकर बजाय हिम्मत हारने के उसके सामने कैसे दहाड़ कर खड़ा हो जाता है और वह समस्या या वो दर्द कैसे उसके सामने दुम दबाकर भाग खड़ी होती है !! मेरे सामने इससे भी बड़ी बात यह है कि कोई भी व्यक्ति किस प्रकार किसी विकट परिस्थिति के सामने आने पर अपने हौसले से उसे बौना साबित कर कर देता है और अपने कर्म के लिए वो जिस भी किसी क्षेत्र का चुनाव करता है उस क्षेत्र का कद भी विराट हो जाता है....आमिर इन बुलंद हौसलों को सलाम मगर एक सवाल मुझे अपने आप से भी है हम पढ़े-लिखे लोग जो अपनी जिन्दगी में टाईम नहीं है-टाईम नहीं का रोना रोता रोते है और अपनी जिन्दगी की अनगिनत समस्यायों को लोगों को गिनाते नहीं थकते....और इस तरह इन बहानों से खुद को अखिल/अखंड सामाजिकता और सरोकारों से बचाए रखते हैं.....ऐसे कार्यक्रमों से शायद हम जैसों को भी कोई दिशा मिले और हम जैसे समाज के लिए नकारा लोग भी समाज की इन जद्दोजहदों में खुद को शामिल कर खुद का ज़िंदा होना साबित कर सकें !!जय-हिंद....वन्दे-मातरम्...सत्यमेव-जयते !!    

http://rajivthepra.blogspot.in/ 
सोचता तो हूँ कि एकांगी सोच ना हो मेरी,किन्तु संभव है आपको पसंद ना भी आये मेरी सोच/मेरी बात,यदि ऐसा हो तो पहले क्षमा...आशा है कि आप ऐसा करोगे !!